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जैसलमेर-जिला स्तरीय अहिंसा एवं कौमी एकता सम्मेलन का भव्य आयोजन

जैसलमेर-जिला स्तरीय अहिंसा एवं कौमी एकता सम्मेलन का भव्य आयोजन गांधीजी के जीवनी के साथ ही अहिंसा एवं कौमी एकता विषयों पर वक्ताओं ने रखे विचार, सम्मेलन में गांधीजी के प्रिय भजनों की शानदारहुई प्रस्तुती

जैसलमेर, 27 फरवरी। जिला शान्ति एवं अहिंसा प्रकोष्ठ के तत्वावधान में जैसलमेर जिला मुख्यालय पर डीआरडीए सभागार में मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिलापरिषद भागीरथ विश्नोई, अतिरिक्त जिला कलक्टर परसाराम के आतिथ्य में जिला स्तरीय अहिंसा एवं कौमी एकता सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस मौके पर तहसीलदार जैसलमेर देसलाराम, मुख्य जिला शिक्षाधिकारी नैनाराम जाणी, उपनिदेशक, महिला एवं बाल विकास महेशचन्द गुप्ता, संरक्षण अधिकारी महिला अधिकारिता चन्द्रवीरसिंह भाटी, जिला खेल अधिकारी राकेश विश्नोई, परियोजना अधिकारी लेखा, जिलापरिषद गोपीकिशन बोहरा के साथ ही शिक्षाविद्, गांधी विचारक एवं अन्य संम्भागी उपस्थित थे।

सम्मेलन के प्रारम्भ में अतिथियों ने गांधीजी की तस्वीर पर सूत की माला पहना कर श्रृद्वा सहित स्मरण किया। मुख्य कार्यकारी अधिकारी विश्नोई ने संम्भागियों को कहा कि इस सम्मेलन का मुख्य उद्वेश्य लोगों को गांधी जी के आदर्श विचारों को संचारित करना है एवं अहिंसा एवं कौमी एकता के उनके सिद्वान्त को प्रसारित करना है।

अतिरिक्त जिला कलक्टर परसाराम ने संम्भागियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज के युवा पीढ़ी को राष्ट्रपिता महात्मागांधी जी के सत्य, अहिंसा एवं कौमी एकता के सन्देश को अपने जीवन में उतारने की महत्ती आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गांधीजी के सिद्वान्त एवं उनके जीवन मूल्य आज भी हमारे लिए बहुत ही प्रासंगिक है।

सम्मेलन के दौरान शिक्षाविद् एवं सहायक आचार्य डॉ. कैलाशदान रतनू ने महात्मागांधी के व्यक्तित्व एवं उनके अहिंसा के मार्गदर्शन पर व्याख्यान देते हुए कहा कि अहिंसा का संदेश जो गांधीजी ने दिया है वह हम सबके लिये अमूल्य है एवं में अहिंसा के सद्गुण को जीवन में अपना कर एक उच्चादर्श का परिचायक बनना है। सहायक आचार्य डॉ. ललित कुमार ने कहा कि गांधीजी के विचार सदैव अमर है एवं उनके द्वारा दिये गये सिद्वान्तों एवं उच्चादर्शो के बारे में अध्य्यन कर अपने जीवन में अंगिकार करने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि आज के परिपेक्ष्य में कौमी एकता समाज के विकास के लिए महत्ती आवश्यकता है एवं हम सबको भाईचारे एवं प्रेमभाव के साथ रहने की सीख गांधी जी के विचारों से लेनी चाहिए। उन्होंने गांधीजी के द्वारा गरीब के भलाई के लिये जो सीख दी गई हैं उसको भी हमें जीवन में संचारित कर सदैव गरीब का भला करना है।

सह आचार्य डॉ. ललित कुमार ने इस मौके पर गांधी जी के जीवनी पर विस्तार से प्रकाश डाला एवं उनके द्वारा बताए गये आदर्शो एवं सद् कार्यो की भी जानकारी संम्भागियों को दी। उन्होंने कहा कि भारतीय वर्ण व्यवस्था में शांति एवं अहिंसा की मुख्य भूमिका है एवं उसके पालन से ही देश सर्वोच्च विकास की ओर प्रगतिरत् होता है। सम्मेलन में सहायक आचार्य मेहराबखान ने भी गांधीजी के जीवन मूल्यों पर प्रकाश डाला। जिला संरक्षण अधिकारी चन्द्रवीरसिंह ने भी गांधीजी के उच्च विचारों की जानकारी देते हुए बताया कि मनुष्य को सर्वप्रथम अपने जीवन में परिवर्तन लाकर उच्च जीवन को साक्षात् करना है।

कार्यक्रम का संचालन व्याख्याता श्रीमती आरती मिश्रा ने किया। सम्मेलन में आनन्द कुमार व्यास, कन्हैया सेवक, अनिल पुरोहित, घनश्यामदास, ज्ञानचंद, सत्यदेव की टीम ने गांधीजी के प्रिय भजन ’’ वैष्णवजन तो तैने कहिए पीर पराई जाने रे’’, ’’ धर्म हो एक सच्चा ,जगत को तार देवें हम’’, ’’पायोजी मैने रामरतन धनपायो’’ तथा ’’रघुपति राघव राजाराम,पतित पावन सीताराम ’’की शानदार प्रस्तुतीयॉं पेश की। कार्यक्रम के दौरान वन्देमातरम् राष्टगीत से शुरुआत की एवं अन्त में राष्ट्रगान की प्रस्तुती की गई।

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